Thursday, January 10, 2019

हिंदी में हम वतन है हिंदुस्तान हमारा जय हिंद

हिंदी में हम वतन है हिंदुस्तान हमारा...
*हिंदी मे है हम वतन, हिंदी भाषा का सभी मिलकर बढ़ाएं  सम्मान: डॉo नरेंद्र कुमार उपमन्यु*  नई दिल्ली/ चंडीगढ़- तेजबंधु संवाददाता/ उपमन्यु टुडे   *विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए उर्दू काउंसिल कमेटी, उर्दू साहित्य अकादमी, युवा नेतृत्व ज्योति साहित्यिक,पत्रकारिता एवं समाजसेवी संस्थान एवं अंजुमन तरक्की उर्दू हिंद हरियाणा के अध्यक्ष डॉo नरेंद्र कुमार 'उपमन्यु' ने दिल्ली के रोहिणी व एक दिन पूर्व समालखा के पट्टीकल्याणा में हिन्दी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि संस्कृत निष्ठ हिंदी देववाणी में हमारे देश की संस्कृति का बखूबी प्रचार-प्रसार करती है! उन्होंने कहा यह बात सत्य है कि प्राचीन काल से ही हिंदी को बड़ी तो उर्दू को छोटी बहन माना गया है,मसलन हम हरियाणवी जो हिंदी बोलते हैं  उसमें अधिकतर अल्फाज उर्दू के होते हैं, इन्हें उद्देश्यों को लेकर निजी संस्थानों और सरकारों ने विभिन्न भाषाओं में अकादमियों का कई दशकों पूर्व गठन किया जिनके माध्यम से सभी भाषाओं का विकास किया जा रहा है! डॉक्टर उपमन्यु ने कहा कि संस्कृत व हिन्दी के विकास के लिए जो राज्य व केंद्र की सरकारों ने सराहनीय कार्य किया है, उसके लिए वे हृदय से आभार प्रकट करते हैं!डॉक्टर उपमन्यु ने विश्व हिन्दी दिवस पर देश के सभी साहित्य, कलमकारों,पत्रकारों, शिक्षाविदों को बधाई दी। इस सम्मेलन में देश और विदेश से संस्कृत व हिन्दी के प्रकाण्ड पंडित व साहित्यकार उपस्थित थे। उन्होंनेे हिन्दी के विकास और भाषा को आगे बढ़ाने के लिए डॉ० राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के योगदान को याद किया और कहा कि ऐसे साहित्यिक पुरोधाओं के कारण ही हिन्दी भाषा का अस्तित्व बचा और आज हिन्दी भाषा विश्व भाषा बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देश में मुगलों और अंग्रेजों के शासन काल में हिन्दी भाषा ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हिन्दी साहित्य प्रेमियों के संघर्ष के चलते हिन्दी भाषा ने निरंतर विकास किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी के विकास के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने ‘‘सत्यार्थ-प्रकाश’’ को हिन्दी भाषा में प्रकाशित किया। ‘‘सत्यार्थ प्रकाश’’ में वेदों का सार है और यह आर्य समाज का आधार ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ० भीम राव अम्बेडकर ने जनता की आवाज को सुन कर 14 सितम्बर, 1949 को संविधान की अनुछेद 343 में शामिल कर हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी 1957 में हिन्दी के लिए आंदोलन हुआ। तत्कालीन हिन्दी आंदोलन में भाग लेने वाले आंदोलनकारियों को हरियाणा की  सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया गया और आज उन्हें मासिक पेंशन के साथ ही स्वास्थ्य कार्ड  व बसों में फ्री यात्रा भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में भाषण देकर हिन्दी प्रेमियों का मस्तक ऊंचा किया। इसी प्रकार देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में ही धाराप्रवाह संबोधन किया। इस मौके पर साहित्य,पत्रकार तथा अंजुमन तरक्की उर्दू हिंद की सम्मानित सदस्य शीला देवी भारद्वाज ने आमजन से अपील की कि हम सब हिन्दी के विकास के लिए आगे आएं और हम सब दिन-प्रतिदिन के कार्यों में हिन्दी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने पहले भी और वर्तमान में भी पत्र जारी करके सभी न्यायपालिका, विधानपालिका,कार्यपालिका और प्रेस के प्रतिनिधियों को आह्वान किया था कि वे केवल हिंदी में ही पत्र व्यवहार करें और अगले ही दिन शेरा के आर्यन ग्लोबल पब्लिक स्कूल में विदेशी नागरिक ने भारत देश को महान बताते हुए यहां की संस्कृति और भारत में बोली जाने वाली हिंदी को बहुत अच्छी भाषा बताया था! कार्यक्रम को देवदास फिल्म के पूर्व सहायक निदेशक अभिषेक वर्मा, संदीप कुमार आर्य,नरेंद्र शर्मा, सुमन शर्मा, सीमा भारद्वाज आदि ने भी संबोधित किया! इस दौरान विक्रम, वीरेंद्र शर्मा, सतपाल कौशिक उपस्थित रहे!*

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